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श्री दक्षिणामूर्ति स्तोत्रम्

भगवान दक्षिणामूर्ति, भगवान शिव का दक्षिणमुखी स्वरूप, आदि गुरु के रूप में पूजित हैं, जो मौन के माध्यम से सर्वोच्च ज्ञान प्रदान करते हैं। भारतीय परम्परा में दक्षिण दिशा प्रतीकात्मक रूप से अज्ञान के विनाश और ज्ञान के उदय से जुड़ी है। वटवृक्ष के नीचे बैठे दक्षिणामूर्ति, उत्सुक शिष्यों से घिरे हुए, उस शाश्वत गुरु का प्रतीक हैं, जो माया के अंधकार को दूर करते हैं और मुमुक्षु को आत्म-साक्षात्कार की ओर ले जाते हैं। इस संग्रह के स्तोत्र, नामावली और सहस्रनाम केवल छंद नहीं हैं; ये पवित्र तरंगें हैं, जिनका प्रत्येक अक्षर दिव्य ऊर्जा से संनादित है। विभिन्न शास्त्रों से संकलित ये रचनाएँ साधकों के लिए तैयार की गई हैं, ताकि वे भक्ति और ज्ञान के पथ पर सहजता से अग्रसर हो सकें ।

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दक्षिणामूर्ति भगवान शिव का वह रूप है, जो ज्ञान, ध्यान और आध्यात्मिक जागृति के प्रतीक हैं । दक्षिणामूर्ति के भजन/ स्तोत्र गुरुवार या गुरु पूर्णिमा के दिन पढ़ने से विशेष फल मिलता है । शांत और एकांत स्थान पर ध्यानपूर्वक पाठ करने से लाभ कई गुना बढ़ता है । ये भजन न केवल आध्यात्मिक बल्कि बौद्धिक और भावनात्मक स्तर पर भी साधक को समृद्ध करते हैं । दक्षिणामूर्ति के स्तोत्र, अष्टक, अष्टोत्तरशतनाम, त्रिशती या सहस्रनाम का पाठ करने से निम्नलिखित विशेष लाभ प्राप्त होते हैं :
1. ज्ञान और बुद्धि की प्राप्ति:
दक्षिणामूर्ति को गुरु और ज्ञानदाता माना जाता है । उनके भजनों का पाठ विद्या, बुद्धि, और एकाग्रता को बढ़ाता है । यह विद्यार्थियों और ज्ञान-साधकों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है ।
2. आध्यात्मिक जागृति:
इन भजनों से मन शांत होता है और आत्म-साक्षात्कार की दिशा में प्रगति होती है । दक्षिणामूर्ति ध्यान और योग के देवता हैं, अतः यह साधना को गहरा करता है ।
3. मन की शांति और तनावमुक्ति:
दक्षिणामूर्ति के नामों और श्लोकों में मंत्रों की शक्ति होती है, जो मानसिक अशांति, चिंता और भय को दूर करती है ।
4. गुरु कृपा और मार्गदर्शन:
दक्षिणामूर्ति को आदि गुरु कहा जाता है । उनके भजनों का पाठ करने से जीवन में सही मार्गदर्शन और गुरु कृपा प्राप्त होती है ।
5. कर्म बाधाओं का निवारण:
नियमित पाठ से पिछले कर्मों के दुष्प्रभाव कम होते हैं और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।
6. विशेष अनुष्ठानों में प्रभाव:
दक्षिणामूर्ति के सहस्रनाम या त्रिशती का उपयोग विशेष पूजा, हवन या गुरु पूर्णिमा जैसे अवसरों पर किया जाता है, जो आध्यात्मिक और सांसारिक उन्नति प्रदान करता है ।

 

Weight 200 g
Dimensions 22 × 14 × 2 cm
book-type

Paperback (pb)

format

Paperback

language

Devanagari

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quality

Special Quality

specification

70 gsm NS

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